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रानू मंडल का जीवन Parichay

दोस्तों हम बात कर रहे हैं रानू मंडल के बारे में दोस्तों अनुमंडल का गांव पश्चिम बंगाल के राणाघाट नामक शहर में है रानू मंडल अपने कैरियर की शुरुआत 19 साल की जब वो थी तभी से शुरू कर दी थी जब रानू मंडल 19 साल की थी तो छोटी मोटी प्रोग्राम में गाना गाती थी और उनसे पैसे कमाती थी जीनकी वजह से उनकी रोजी-रोटी चलती थी। फिर उसके बाद से उनकी शादी हो गई और वह अच्छे से रहने लगी। उनके हस्बैंड मुंबई रहते थे और उनके हस्बैंड की एक्सीडेंट मे मृत्यु हो गई और वह घर पर ही रहने लगी फिर कुछ दिनों तक वाह फिरोज खान बॉलीवुड के स्टार के घर झाड़ू पोछा का भी काम किया और उनके चाचा की देखभाल Bhi kki. धीरे-धीरे उनकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर होती चली गई लड़की की कैसे भी करके इधर उधर से लड़की की शादी करी उसके बाद से अकेले ही रहने लगी। धीरे-धीरे टाइम निकलता गया अब पति भी साथ में नहीं थे अपना रोजी रोटी के लिए अपने ही गांव के राणाघाट स्टेशन पर गाना गाकर के अपना रोजी रोटी कमाती थी। हजारों लोग उनके गानों को सुनते थे। और लोग एक रुपए ₹2 दिया करते थे कुछ लोग तो बिस्किट भी देते थे और चले जाते थे और वह उसी से अपने पेट भर...

लोगो को सेल्फीस नही होने चाहीऐ।

कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें देखते ही हर कोई अपना मुंह फेर लेता है पीठ पीछे उसकी खिल्ली उड़ाता है उससे नफरत करता है क्योंकि वह व्यक्ति ज्यादा देर तक कीसी की बात नहीं सुन सकता उसकी कोशिश तो यही होती है कि सामने वाले की बात बीच में काट कर अपनी बात रखी जाय। क्या आप इस किस्म के लोगों को जानते हैं हम में से प्रत्येक ही ऐसे व्यक्ति के संपर्क में जरूर आया होगा ऐसे व्यक्ति को लोग बोरिंग इंसान कहते हैं जो अपने आप ही चुप रहता है तथा खुद को ही आकर्षण का केंद्र बनाना चाहता है एक और सच्चाई यह भी है कि जो लोग केवल अपने बारे में ही बातें करते हैं वे सोचते भी केवल अपने बारे में ही है इसलिए कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट डॉक्टर निकोलस ने ऐसे लोगों के विषय में कहा है कि "जो लोग केवल अपने ही बारे में सोचते है वह अशिक्षित होते हैं चाहे कितनी भी डिग्रियां हासिल कर ली हो वह हमेसा अनपढ ही रहेंगे" अब यदि आप चाहते हैं तो पहले खुद को बनाने के लिए सामने वाले को मनोरंजन लगे उनके बारे में उनकी उपलब्धियों के बारे में याद रखें आपकी समस्याओं में है उससे सौ गुना ज्यादा रुचि अपने आपको तथा अपनी समस्याओ...

Happy life in Hindi

दुख को सुख मे बदलने की कला HAPPY LIFE IN HINDI किसी ने ठीक ही कहा है की ज़िंदगी का रोना भी कोई रोना है, ज़िंदगी रोकर काटो या हँसकर वह तो कट ही जाती है। सुख और दुख ज़िंदगी के खेल है। इन्हे खेल की तरह खेलते हुए चलने का नाम ही ज़िंदगी है। अगर दुखो को नजरंदाज न किया जाये तो जीना मुश्किल हो जाता है। दुख का प्रत्यश रूप जितना बड़ा दिखाई देता है अंदर से वह उतना हो खोखला और कमजोर होता है। अगर विचारो को मजबूत बनाकर रखा जाये तो दुख हवा के झोखे के साथ गायब होने वाले पानी के बुलबुलों की तरह होते है। दुख, तकलीफ, आपदाए इंसान की ज़िंदगी के साथ जुड़ी हुई ऐसी अप्रसंगिक घटनाये है जो क्षति पहुंचाकर हमे विचलित कर देती है। कभी कभी तो अविवेकी इंसान सहनशक्ति के अभाव मे अपने होश खो बैठता है। मुसीबतों को टालने की कोशिश करते हुए भी हमारा मन विचलित हो ही उठता है। आगे बढ़ने के सारे दरवाजे बंद होते देखकर सिर पकड़ कर बैठने के सिवाए कोई ओर रास्ता नजर नहीं आता। आखिर ऐसा क्यो होता है? Kaरण यह है की हमारी nakaratmk soch our chintan हम पर हावी हो जाते है। कहते है की इंसान जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है। अगर soch sakar...